October 3, 2022
Varsha Ritu Par Nibandh

वर्षा ऋतु पर निबंध – Varsha Ritu Par Nibandh In Hindi

Varsha Ritu Par Nibandh :-  ” वर्षा ऋतु ” भारत की प्रमुख चार ऋतुओं में सबसे महत्वपूर्ण ऋतु है।

इस ऋतु को जीवनदायिनी ऋतु के तौर पर जाना जाता है। अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में वर्षा ऋतु के सम्बन्ध में सवाल पूछ लिए जाते है , लेकिन जानकारी की कमी की वजह से लोग इसका जवाब ठीक से नहीं दे पाते है।

इसलिए आज हम आपको बताएँगे, कि Varsha Ritu Par Nibandh कैसे लिखा जाता है। तो चलिए शुरू करते हैं –


भारत में पाई जाने वाली प्रमुख ऋतु कौन कौन सी है ?

  • वसंत ऋतु
  • ग्रीष्म ऋतु
  • वर्षा ऋतु
  • शरद ऋतु
  • हेमंत ऋतु
  • शीत ऋतु

इन सब में से आज हम आपको बरसात के मौसम यानी कि Varsha Ritu Par Nibandh  प्रदान करेंगे।


वर्षा ऋतु पर निबंध | Varsha Ritu Par Nibandh :- 

वर्षा ऋतु क्या है ?

वर्षा ऋतु को बरसात का मौसम भी कहा जाता है, लगभग 15 जून के बाद वर्षा ऋतु की शुरूआत हो जाती है।

कई बार यह समय से पहले भी शुरू हो सकती है, लेकिन यह देखा गया है, कि वर्षा ऋतु का आवागमन जून-जुलाई में होता है, जो सितंबर-अक्टूबर तक रहती है।

वर्षा ऋतु कब आती है ?

वर्षा ऋतु के आने का समय सामान्य तौर पर जून-जुलाई के महीने से लेकर सितंबर-अक्टूबर के महीने तक होता है।

यह मूल रूप से मानसून की हवाओं के कारण हिंद महासागर, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी की और से भारत के पश्चिम विभाग की ओर चलने वाली हवाओं से बादलों का स्थानांतरण करती है।

यदि हम हिंदी महीनों की बात करें, तो भारतीय हिंदी महीनों के अनुसार सावन के महीने में बरसात शुरू होती है।

सावन के महीने को भगवान शिव का महीना भी कहा जाता है। ऐसा भी कहा जाता है, कि जब भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं, तब वर्षा ऋतु आती है।


वर्षा ऋतु क्यों आती है ?

वर्षा ऋतु के आने का कारण बड़ा ही आसानी से समझा जा सकता है। वर्षा ऋतु मूल रूप से तेज हवाओं और वाष्पीकृत बादलों के समूह का तेज हवाओं में मिल जाने के कारण भारत के दक्षिण भाग से पश्चिम भाग तक पहुंचने की प्रक्रिया को कहा जाता है।

वाष्पीकरण की प्रक्रिया मूल रूप से तब शुरू होती है, जब पृथ्वी के एक भूभाग में गर्मी की वजह से तापमान अधिक होता है, तथा जलीय भाग पर तापमान की वजह से दाब कम हो जाता है।

इससे तेज हवाएँ ऊपर की ओर मुड़ करके बड़े-बड़े बादलों का निर्माण करती है।

इसको हम ओर भी अधिक आसान भाषा में इस प्रकार समझ सकते हैं, कि जब पृथ्वी पर बरसात से पहले गर्मी का मौसम होता है, तो भूमि का तापमान बढ़ जाता है और समुद्र का तापमान घट जाता है।

जिसकी वजह से आसमान में तेजी से वाष्पीकरण के कारण वाष्पीकृत हवाएँ बढ़ती है। वह हवाएँ मानसून की हवाओं से मिलकर के बड़े-बड़े बादलों का निर्माण करती है, जो दक्षिण से पश्चिम की ओर जाती हैं।

जैसा कि हम जानते हैं, कि हिंद महासागर काफी चौड़ाई में फैला हुआ है और काफी बड़ा है, जिसकी वजह से दक्षिण से पश्चिम तक आने वाली हवाएँ पूरे भारत को ही घेर लेती है।


वर्षा ऋतु के क्या लाभ है ?

वर्षा ऋतु के अपने आप में बहुत सारे लाभ होते हैं, जिसके कारण पुराने समय में लोग वर्षा ( बरसात ) को बुलाने के लिए महायज्ञ का अनुष्ठान तथा भगवान इंद्र की पूजा करते थे, क्योंकि ऐसा माना जाता है, कि भगवान इंद्र बरसात के देवता है।

  • वर्षा ऋतु का आगमन तेज गर्मी के दौरान होता है, जो कि हमें तेज गर्मी से बचाता है, तथा पूरे मौसम को थोड़ा ठंडा कर देता है, जिसकी वजह से हमें पसीने से तथा अन्य कई तकलीफों से छुटकारा मिलता है।
  • वर्षा ऋतु के आगमन के कारण कई प्रकार की फसलें अपना जीवन प्राप्त करती है।
  • किसान वर्षा ऋतु में खरीफ की फसलें बोते हैं।
  • इसके अलावा वे वनस्पतियां जो गर्मी के कारण सूख चुकी होती है, उनमें भी वर्षा ऋतु के कारण जीवन का संचार हो जाता है, इसके अलावा बाग बगीचे हरे भरे हो जाते हैं, पहाड़ों पर हरे रंग की चादर बिछ जाती है।
  • भूमि का जल स्तर बढ़ जाता है, तथा इसके कारण लोगों को पीने का पानी भी मिलता है।
  • बहुत ही कम देखा जाने वाला मोरों का नृत्य देखने का भी मौका मिलता है।
  • इसके अलावा वर्षा ऋतु के आने पर हमें गरमा गरम पकौड़े खाने का मौका भी मिलता है। कई बार तो हमें पकोड़ों के साथ चाय और समोसे भी मिल जाते हैं।

वर्षा ऋतु का प्रभाव क्या है ?

वर्षा ऋतु भारत में देखी जाने वाली छह ऋतुओ में से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ऋतु है, क्योंकि यदि वर्षा ऋतु नहीं हो तो बाकियों का महत्व अपने आप ही कम हो जाता है।

भारत में ग्रीष्म ऋतु, वसंत ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, हेमंत ऋतु, शिशिर ऋतु अपने प्रभाव छोड़ती है। लेकिन इन सब में से वर्षा ऋतु के प्रभाव दूरगामी होते है।

  • वर्षा ऋतु का सबसे बड़ा प्रभाव यह होता है, कि वर्षा ऋतु किसानों की जीवन रेखा होती है। यदि किसी वर्ष वर्षा ना आए तो किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा आसमान छूने लगता है।
  • वर्षा ऋतु के कारण ही बड़े-बड़े जंगल, नदियाँ, पेड़-पौधे, वनस्पतियां, औषधियां अपना अस्तित्व खोने से बचती है।
  • मॉनसून का प्रभाव उस आम आदमी पर भी पड़ता है, जो खेती नहीं करता, और किसान नहीं होता है, क्योंकि मानसून उसे एक ऐसा मौसम उपलब्ध करवाता है, जहां पर वह तेज गर्मी से बच सकता है।
  • इसके अलावा फ़सलों पर, पशु-पक्षियों पर, इंसानों पर, मौसम पर तथा जमीन पर रहने वाले सभी सजीव और अजीवों पर वर्षा ऋतु का सीधा प्रभाव पड़ता है।

वर्षा ऋतु में होने वाली बीमारियां :- 

Varsha Ritu Par Nibandh को जारी रखते हुए अब हम आपको बताएँगे वर्षा ऋतु में होने वाली बीमारियां।

बरसात के दिनों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां हमें घेर लेती है। खास करके यह सभी बीमारियां मूल रूप से संक्रामक बीमारियों की श्रेणी में डाली जा सकती है। वह बीमारियां जो छूने से, साथ में खाना खाने से और आपस में बैठने से फैलती है, जैसे कि–

  • हैजा की बीमारी
  • महामारी
  • चेचक
  • डेंगू
  • सुजाक
  • हेपिटाइटिस ए
  • हेपिटाइटिस बी
  • हेपिटाइटिस सी
  • इनफ्लुएंजा
  • मलेरिया
  • खसरा
  • टाइफाइड
  • स्वाइन फ्लू
  • पोलियो
  • ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी

वर्षा ऋतु में इन सभी बीमारियों के फैलने की संभावनाएं सबसे ज्यादा हो जाती है। वर्षा ऋतु में इन्हीं संक्रामक बीमारियों के केस सबसे ज्यादा आते हैं।


For More Information Watch This Video :-

निष्कर्ष :-

आज के लेख में हमने आपको Varsha Ritu Par Nibandh के बारे में जानकारी दी है। इसके अलावा हमने वर्षा ऋतु के बारे में और भी विस्तार से आपको बताया है।

हम आशा करते हैं, कि आज का लेख आपके लिए काफी ज्ञानवर्धक रहा होगा। यदि आपका कोई सवाल है, तो आप हमें नीचे कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं।

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